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ईरान युद्ध के बीच टूट गए जीएसटी कलेक्शन के सारे रेकॉर्ड, अप्रैल में सरकार की बंपर कमाई

Updated on 01-05-2026 12:35 PM
नई दिल्ली: ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में भारी इजाफा हुआ है। इससे भारत में आर्थिक गतिविधियों पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ा है। देश में अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन 2.42 लाख करोड़ रुपये के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। नए वित्त वर्ष के पहले महीने जीएसटी कलेक्शन में भारी उछाल इस बात का संकेत है कि देश की इकॉनमी तेजी से आगे बढ़ रही है। अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन में पिछले साल के मुकाबले 8.7 फीसदी की तेजी आई है।

इससे पहले एक महीने में सबसे अधिक जीएसटी कलेक्शन का रेकॉर्ड पिछले साल अप्रैल में बना था। उस महीने यह 2.37 लाख करोड़ रहा था। इस बार नेट जीएसटी कलेक्शन 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा जो पिछले साल की तुलना में 7.3 फीसदी अधिक है। अप्रैल में टोटल रिफंड भी 19.3 फीसदी बढ़कर 31,793 करोड़ रुपये रहा। इस तरह नेट जीएसटी रेवेन्यू 2,10,909 करोड़ रुपये रहा। इसमें इम्पोर्ट लिंक्ड रेवेन्यू की मजबूत भूमिका रही।

रेकॉर्ड पर जीएसटी कलेक्शन

  • अप्रैल में GST कलेक्शन 2.42 लाख करोड़ के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंचा
  • यह कलेक्शन पिछले साल अप्रैल की तुलना में 8.7 फीसदी अधिक है
  • पिछले साल अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन ₹2.37 लाख करोड़ रहा था
  • नेट जीएसटी कलेक्शन भी 7.3% बढ़कर 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा
  • महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु और यूपी सबसे आगे

टॉप 5 राज्य

अप्रैल में ग्रॉस इम्पोर्ट रेवेन्यू 25.8 फीसदी उछलकर 57,580 करोड़ रुपये पहुंच गया जबकि ग्रॉस डोमेस्टिक रेवेन्यू 4.3 फीसदी तेजी के साथ 1.85 लाख करोड़ रुपये रहा। कस्टम से नेट रेवेन्यू यानी आयात पर जीएसटी में 42.9 फीसदी तेजी आई जबकि नेट डोमेस्टिक रेवेन्यू में केवल 0.3 फीसदी तेजी रही। इससे साफ है कि अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन में तेजी में एक्सटरनल ट्रेड की अहम भूमिका रही।जीएसटी कलेक्शन में टॉप पांच राज्यों में महाराष्ट्र (13,793 करोड़ रुपये), कर्नाटक (5,829 करोड़ रुपये), गुजरात (5,455 करोड़ रुपये), तमिलनाडु (4,724 करोड़ रुपये) और उत्तर प्रदेश (4,399 करोड़ रुपये) शामिल हैं। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 8.3 प्रतिशत बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपए हो गया। पिछले वित्त वर्ष (2025) में यह 20.55 लाख करोड़ रुपये था। नेट जीएसटी कलेक्शन 19.34 लाख करोड़ रुपये रहा जो वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 7.1% अधिक है। यह वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत आर्थिक गतिविधि का संकेत देता है।

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