भोपाल। राजधानी भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पूरे मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा और भरोसेमंद सरकारी अस्पताल है। यहां बेहतर और सुरक्षित इलाज की उम्मीद में प्रतिदिन चार हजार से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। लोग प्रदेश के दूर-दराज के जिलों से इस उम्मीद के साथ यहां आते हैं कि उन्हें एक सुरक्षित माहौल मिलेगा। लेकिन नवदुनिया पड़ताल में एम्स परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की एक बेहद डरावनी और अलग ही तस्वीर सामने आई है।
अस्पताल की पार्किंग रात ढलते ही नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का सुरक्षित अड्डा बन जाती है, जिससे यहां रात गुजारने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एम्स भोपाल की पार्किंग में शराब और बीयर की बोतलें मिलीं।
दिन के समय जिस पार्किंग में मरीजों और डाक्टरों के वाहनों की लंबी कतारें होती हैं, रात के अंधेरे में वहां का नजारा पूरी तरह बदल जाता है। अंधेरे और सन्नाटे का फायदा उठाकर नशेड़ी यहां अपना डेरा जमा लेते हैं। जो गरीब और मजबूर परिजन अपने मरीजों की देखभाल के लिए अस्पताल परिसर या पार्किंग के आसपास रात गुजारने को विवश होते हैं, वे पूरी रात दहशत के साए में रहते हैं। नशेड़ियों की गाली-गलौज, शोर-शराबे और असभ्य व्यवहार के कारण खासकर महिलाओं और बुजुर्गों को भारी असहजता का सामना करना पड़ता है।
एम्स जैसे संवेदनशील संस्थान में यह कोई नई समस्या नहीं है। इससे पहले भी रात के समय अस्पताल की इमरजेंसी (कैजुअल्टी) के बाहर शराबियों और असामाजिक तत्वों ने जमकर हंगामा किया था। उस घटना से मरीजों में अफरा-तफरी मच गई थी। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसियों ने कोई ठोस सबक नहीं लिया।
तीमारदारों का दर्द है कि वे अपने बीमार अपनों की चिंता करें या इन नशेड़ियों से खुद की हिफाजत करें। गार्ड बेपरवाह, पुलिस की गश्त पूरी तरह नदारदइतनी बड़ी स्वास्थ्य संस्था होने के बावजूद यहां की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी सेंध नजर आती है। पार्किंग और अस्पताल परिसर के आसपास तैनात निजी सुरक्षा गार्ड इस समस्या की ओर बिल्कुल ध्यान नहीं देते। वे नशेड़ियों को रोकने या टोकने की जहमत नहीं उठाते।
दूसरी ओर, स्थानीय पुलिस की गश्त भी रात के समय नदारद रहती है, जिसके कारण इन असामाजिक तत्वों के हौसले और भी बुलंद हो गए हैं। पुलिस का खौफ न होने से ये लोग खुलेआम अस्पताल परिसर का माहौल बिगाड़ते हैं।
गार्ड ने खुद खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोलएम्स की सुरक्षा में तैनात एक गार्ड ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रात के समय पार्किंग और आसपास के सुनसान इलाकों में नशेड़ी अक्सर आकर बैठ जाते हैं। अगर हम उन्हें टोकते हैं या वहां से जाने को कहते हैं, तो वे विवाद और हाथापाई पर उतारू हो जाते हैं। पुलिस का नियमित राउंड नहीं होता और न ही इमरजेंसी में तुरंत बैकअप मिलता है, इसलिए हम लोग भी इनसे उलझने से बचते हैं।