GNews7.com

'FCRA बिल किसी धर्म पर निशाना नहीं', भारतीय राजदूत ने सबूतों के साथ अमेरिकी प्रोपेगैंडा किया ध्वस्त, बताया क्‍यों जरूरी

Updated on 10-08-2026 01:56 PM
वॉशिंगटन: अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने प्रस्तावित FCRA संशोधन बिल 2026 को लेकर चल रही अटकलों का खंडन किया है जिसमें कहा जा रहा है कि यह कानून ईसाई मिशनरियों को निशाना बनाने के लिए लाया गया है। अमेरिका के एक सांसद ने दावा किया था कि FCRA के नियम ईसाइयों पर हमला हैं। क्वात्रा ने कहा कि इसका मकसद NGO, धर्मों या विदेशी फंडिंग से होने वाली सही चैरिटी को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि यह कानून पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में है।

भारतीय राजदूत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "मीडिया और सिविल सोसाइटी में प्रस्तावित विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA) 2026 को लेकर कई गलतफहमियां हैं।" उन्होंने अलग-अलग पॉइंट में इन गलतफहमियों का खंडन किया है।

पहला मिथक- सिविल सोसाइटी को मदद रोकना

उन्होंने लिखा कि पहला मिथक है कि भारत सिविल सोसाइटी को मिलने वाली विदेशी मदद को रोकने के लिए नया कानून बना रहा है। उन्होंने आगे लिखा कि सह यह है कि "पब्लिक और पॉलिटिकल जगहों पर विदेशी पैसे के लेन-देन को रेगुलेट करना राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक संप्रभु कदम है। दुनिया भर के कई लोकतांत्रिक देशों में आधुनिक शासन व्यवस्था का यह एक स्वीकृत हिस्सा है।"

उन्होंने FCRA कानून के पहले से होने का जिक्र किया और जोर देकर कहा कि यह भारतीयों को विदेशी चंदा लेने से नहीं रोकता है और न ही नियमों का पालन करने वाली सिविल सोसाइटी को बंद करता है। उन्होंने बताया कि हजारों संस्थाएं FCRA के तहत रजिस्टर्ड हैं और उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा राहत, रिसर्च और मानवीय कार्यों के लिए नियमित रूप से विदेशी फंड मिलता है।

दूसरा मिथक- NGO के कामकाज पर रोक

  • एक मिथक है कि FCRA ने NGO और चैरिटेबल संस्थाओं के कामकाज पर बुरा असर डाला है। नए संशोधन से भारत में उनके काम करने की क्षमता सीमित होगी।
  • इसका खंडन करते हुए क्वात्रा ने लिखा, असल में भारत में विदेशी पैसा का आना कम नहीं हुआ, बल्कि बढ़ा है। उन्होंने बताया कि रजिस्टर्ड संस्थाओं को मिलने वाला विदेशी चंदा 2010-11 में लगभग 1.2 अरब डॉलर था, जो 2024-25 में 2.67 अरब डॉलर हो गया है।
  • भारत में 30 लाख से ज्यादा NGO हैं। इनमें सिर्फ 14450 के पास ही FCRA रजिस्ट्रेशन है। इस तरह ज्यादातर सिविल सोसाइटी संस्थाएं इस कानून से बाहर हैं।
  • उन्होंने कहा कि FCRA किसी को भी विदेशी चंदा, रिसर्च अनुदान या मानवीय सहायता लेने से नहीं रोकता। यह कहता है कि रजिस्ट्रेशन कराएं, तय प्रक्रिया से पैसा लें और बताएं कि आपने उस पैसे का क्या किया।

तीसरा मिथक- धार्मिक संगठनों की संपत्ति होगी जब्त

  • उन्होंने तीसरे मिथक का जिक्र किया जिसमें कहा जा रहा है कि इस कानून के कारण विदेशी चंदे पर निर्भर NGO- धार्मिक चैरिटी, पूजा-स्थल, अस्पताल, स्कूल और धर्मार्थ संगठन- की संपत्ति जब्त कर ली जाएगी।
  • इसके जवाब में लिखा, सच यह है कि भारत सही अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का स्वागत करता है और उसने हमेशा ऐसा कानूनी ढांचा उपलब्ध कराया है जिसके तहत इस तरह का योगदान हासिल किया जा सके और उसका इस्तेमाल किया जा सके।
  • रजिस्ट्रेशन रद्द या सरेंडर करने पर विदेशी योगदान और उनसे बनी संपत्ति पहले ही राज्य सरकार के अधिकार में आ जाती है। यह नियम 2010 से ही लागू है। यह कोई नई बात नहीं है।
  • 2026 का बिल इन संपत्तियों की सुरक्षा और साथ ही वापसी का भी रास्ता देता है। संगठन का रजिस्ट्रेशन बहाल होने पर सारी संपत्ति और बचा हुआ फंड पूरा वापस कर दिया जाता है।

चौथा मिथक- FCRA किसी एक धर्म पर निशाना

क्वात्रा ने इसे खारिज करते हुए कहा, यह बात बिल्कुल गलत है। यह कानून सभी संगठनों पर एक समान रूप से लागू होता है। चाहे उनका धर्म, समुदाय या विचारधारा कुछ भी हो। हर धर्म के संगठनों की आस्था आधारित कल्याणकारी गतिविधियां विदेशी फंडिंग के योग्य बनी हुई हैं।

5वां मिथक- ऐसा करने वाला भारत अकेला

  • क्वात्रा ने उन गलतफहमियोंको भी खारिज किया कि ऐसा करने वाला भारत अकेला देश है और इसके लिए अमेरिका का ही उदाहरण दिया। अमेरिका में 1938 से FARA और FATCA लागू है।
  • ऑस्ट्रेलिया ने 2018 में और कनाडा ने 2024 में कानून बनाया। वहीं, ब्रिटेन ने इस तरह की योजना जुलाई 2025 में लागू की। उन्होंने बताया की यूरोपीय संघ भी इस पर कानून बना रहा है।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 11 August 2026
माले/इस्लामाबाद: मालदीव अपनी कमजोर अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए दक्षिण एशियाई देशों के संगठन 'सार्क' को फिर से शुरू करने की कोशिशें कर रहा है लेकिन उसके सारे दांव नाकाम…
 11 August 2026
मॉस्को/कीव: रूसी वायुसेना ने 4-5 अगस्त की रात को यूक्रेन पर 24 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। यूक्रेनी वायु सेना ने इन मिसाइलों को 'इस्कंदर-M/S-400' कैटेगरी में रखा है। इसका…
 11 August 2026
लंदन: सूडान में चल रहे नरसंहार को लेकर दुबई के शासक को लंदन की सड़कों पर घेर लिया गया। मोहम्मद बिन राशिद अल-मकतूम जो दुबई के शासक होने के साथ…
 11 August 2026
वॉशिंगटन/अंकारा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पिछले महीने NATO शिखर सम्मेलन के बाद बेहद सीक्रेट तरीके से एक मिलिट्री विमान के जरिए तुर्की से बाहर निकाला गया था। अमेरिकी सीक्रेट…
 11 August 2026
काठमांडू: नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि 1816 की वह मूल सुगौली संधि नहीं मिल रही है जिसने ब्रिटिश भारत के साथ उसकी सीमा तय की…
 11 August 2026
तेल अवीव: सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुए डिफेंस पैक्ट के बाद इजरायली डिफेंस सर्किल में भारत को 'इंश्योरेंस पॉलिसी' की तरह देखा जा रहा है। इजरायल में…
 10 August 2026
ढाका: भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से सोमवार को मुलाकात की है। बांग्लादेश का उच्चायुक्त नियुक्त होने के बाद त्रिवेदी की बांग्लादेश के प्रधानमंत्री…
 10 August 2026
तेल अवीव: सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए 'मक्का समझौते' के बाद इजरायल का मानना है कि इस समझौते के बाद उसके भारत से संबंध और मजबूत होंगे।…
 10 August 2026
ढाका: बांग्लादेश में हो रहे अहम घटनाक्रम के बीच भारत के चार सुरक्षा अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल ढाका पहुंचा है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल बांग्लादेशी सेना की खुफिया एजेंसी डॉयरेक्टरेट जनरल ऑफ…
Advt.