नई व्यवस्था के तहत पंचायतें आशा कार्यकर्ता, एएनएम और स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बनाकर काम करेंगी। गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन, नियमित स्वास्थ्य जांच, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं का समय पर रेफरल, संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करना, नवजात शिशुओं की देखभाल और टीकाकरण जैसी जिम्मेदारियां पंचायतों की निगरानी में पूरी की जाएंगी। इसके साथ ही गांवों को खसरा-रूबेला मुक्त बनाने पर भी विशेष जोर रहेगा।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार यदि किसी पंचायत में पूरे एक वर्ष तक मातृ मृत्यु, रोकी जा सकने वाली शिशु मृत्यु और खसरा-रूबेला का एक भी मामला सामने नहीं आता है, तो उस पंचायत को 'सुमन पंचायत' घोषित किया जाएगा। ऐसी पंचायत को प्रोत्साहन स्वरूप एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
मिशन संचालक डॉ. सलोनी सिडाना ने इस पहल के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।