सितंबर में आए 70% IPO ने लिस्टिंग पर दिया अच्छा फायदा, क्या इशारा दे रहा है NSE का GMP?
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23-09-2026 12:05 PM
नई दिल्ली: प्राइमरी मार्केट में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए सितंबर का महीना शानदार रहा है। इस महीने लिस्ट हुए IPO में से ज्यादातर ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। लेकिन असली परीक्षा एनएसई की लिस्टिंग पर होगी। यह देश का इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ है जो करीब छह गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसकी लिस्टिंग 24 सितंबर को होने की संभावना है। NSE के ग्रे मार्केट प्रीमियम में तेजी से आई गिरावट को देखते हुई लिस्टिंग के सामान्य रहने की उम्मीद है।Ace Equity के डेटा के अनुसार इस महीने अब तक लिस्ट हुए 16 IPO में से बहुत कम ने लिस्टिंग के दिन निराश किया है। केवल पांच शेयर अपने इश्यू प्राइस से नीचे लिस्ट हुए, जबकि एक फ्लैट लिस्ट हुआ। बाकी सभी ने लिस्टिंग पर अपने निवेशकों को पॉजिटिव रिटर्न दिया है। लिस्टिंग के बाद की स्थिति और भी बेहतर है। अब सिर्फ 5 कंपनियों के शेयर अपने इश्यू प्राइस के मुकाबले फ्लैट या नेगेटिव हैं।किसे हुआ सबसे ज्यादा फायदा?
सबसे ज्यादा फायदे में ESDS सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन रही। कंपनी का शेयर 429 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 746 रुपये पर लिस्ट हुआ। यानी लिस्टिंग पर 74% का फायदा हुआ। अब यह 1,703 रुपये के लेवल पर ट्रेड कर रहा है, जो इश्यू प्राइस से 297% ज्यादा है। इसी तरह ग्लास वॉल सिस्टम्स अपने इश्यू प्राइस से 70% ऊपर है। करमतारा इंजीनियरिंग 44%, स्टीमहाउस इंडिया 39%, Kanohar इलेक्ट्रिकल्स 38%, ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज 32% और रेंटोमोजो 30% ऊपर हैं।आंकड़ों से साफ है कि कमजोर लिस्टिंग का मतलब हमेशा कमजोर रिटर्न नहीं होता। प्रासोल केमिकल्स इश्यू प्राइस से 10% नीचे लिस्ट हुआ था, लेकिन अब यह अपने IPO प्राइस से 4% ऊपर है। इसी तरह सिम्बायोटेक फार्मालैब थोड़ी कम कीमत पर लिस्ट हुआ था, लेकिन अब यह इश्यू प्राइस से 13% ऊपर है।NSE की तुलना
हालांकि लिस्टिंग पर मिला फायदा हमेशा बना नहीं रहा। उदाहरण के लिए प्रणव कंस्ट्रक्शन्स 31% के फायदे के साथ लिस्ट हुआ था, लेकिन अब यह अपने इश्यू प्राइस से 17% नीचे है। LCC प्रोजेक्ट्स भी 31% के फायदे के साथ लिस्ट हुआ था, लेकिन अब यह इश्यू प्राइस से सिर्फ 1% ऊपर है। इससे पता चलता है कि लिस्टिंग मार्केट ने IPO को अच्छा रिस्पॉन्स दिया है।सितंबर का रेकॉर्ड NSE के लिए काम का तो है, लेकिन पूरी तरह से तुलना करने लायक नहीं है। सितंबर में आए ज्यादा IPO बहुत छोटे थे। NSE का आईपीओ ₹22,561 करोड़ का था। बड़े IPO में लिस्टिंग गेन के लिए इंस्टीट्यूशनल डिमांड काफी ज्यादा होनी चाहिए। इसमें सप्लाई का दबाव भी ज्यादा होता है क्योंकि ट्रेडिंग के लिए ज्यादा शेयर उपलब्ध होते हैं।क्या संकेत दे रहा GMP?
लेकिन इसका लगातार गिरता जीएमपी चिंता की बात है। NSE का GMP घटकर लगभग 2% रह गया है, जो प्राइस बैंड की घोषणा के समय देखे गए लेवल से काफी कम है। इसमें लगातार गिरावट आई है। ₹1,785 के ऊपरी प्राइस बैंड पर 2% प्रीमियम के साथ ग्रे मार्केट लिस्टिंग में मामूली फायदे का संकेत मिल रहा है। जानकारों का कहना है कि इन्वेस्टर्स को अपनी उम्मीदों को कंट्रोल में रखना चाहिए।