इंदौर में अनंत चतुर्दशी पर 103 साल पुरानी परंपरा के तहत 22 से ज्यादा झांकियों का चल समारोह निकला। शाम 6 बजे खजराना गणेश मंदिर की झांकी से शुरुआत हुई। इसके बाद अलग-अलग मिलों, इंदौर विकास प्राधिकरण, नगर निगम और अन्य संस्थाओं की झांकियां शामिल हुईं। रात तक झांकियों का कारवां आगे बढ़ता रहा। ड्रोन VIDEO में सड़क पर झांकियों की लंबी कतार और किनारे जुटे लोग नजर आए।
चांद पर सवार गणपति, महाकाल के दर्शन
खजराना गणेश मंदिर की झांकी में चंद्रमा पर सवार गणपति नजर आए। कृष्णपुरा छतरी, चांद और गणपति बप्पा का एक फ्रेम भी कैमरे में कैद हुआ। एक झांकी में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कराए गए। झांकियों में राम-लक्ष्मण, हनुमानजी, लक्ष्मी पूजा, जगन्नाथ रथयात्रा समेत पौराणिक प्रसंग और सामाजिक संदेश दिखाए गए।
अखाड़ों में महिलाओं-बच्चियों ने दिखाए करतब
चल समारोह के साथ अलग-अलग अखाड़ों ने शस्त्र कला, लाठी और पारंपरिक करतब दिखाए। पंचमुखी अखाड़ा की बच्चियों ने शस्त्र कला का प्रदर्शन किया। महिलाओं और लड़कियों की मंडली ने भी करतब दिखाए। कई जगह लड़कियां ढोल बजाते हुए चल समारोह में शामिल हुईं। पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने नियमों का पालन करने वाले अखाड़ों के लिए ‘इंदौर गौरव सम्मान’ की घोषणा की।
बैंड और झांकियों में दिखे अलग-अलग रंग
राजकमल बैंड, बॉबी स्टार बैंड और हनुमंत ध्वज पताका टीम की प्रस्तुतियां भी चल समारोह का हिस्सा रहीं। ‘भूल भुलैया’ के छोटा पंडित के किरदार में पहुंचा युवक भी आकर्षण रहा। झांकियों में बाली-सुग्रीव युद्ध, सावित्री-सत्यवान, पूतना वध और द्रौपदी चीरहरण जैसे प्रसंग भी दिखाए गए।
प्रदेशभर में दी गणपति बप्पा को विदाई
भोपाल में मुस्लिम महिलाओं ने गणेश विसर्जन जुलूस पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। कलियासोत डैम पर विसर्जन के दौरान एक बच्ची रोने लगी। भिंड में 100 से ज्यादा स्थानों पर विसर्जन जारी रहा। ओंकारेश्वर में ग्रामीण इलाकों से 100 से ज्यादा प्रतिमाएं पहुंचीं। खंडवा के नाहल्दा में विसर्जन के दौरान दो सगे भाई तालाब में डूब गए।