GNews7.com

11 रुपये का IV सेट 325 में , प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी कीमत पर कैसे लगे ब्रेक? राहत को चाहिए 5 सूत्रीय इलाज

Updated on 25-09-2026 11:36 AM
इंदुभूषण: किसी अस्पताल की इंटेंसिव केयर यूनिट ( ICU ) के बाहर बैठा व्यक्ति अपने परिजन के इलाज की चिंता कर रहा होता है, न कि कीमतों पर मोलभाव। अस्पताल द्वारा 11.05 रुपये में खरीदा गया आईवी सेट 325 रुपये और 29.41 रुपये का कैथेटर 310 रुपये में बेचना सवाल खड़े करता है। महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की जांच में कुछ अस्पतालों में सामान की कीमत 2,841% तक ज्यादा मिलीं। केंद्र ने राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) से रिपोर्ट मांगी है।

अलग स्थिति: नियम समस्या के लिहाज से होने चाहिए। स्टैंडर्ड सामान पर बहुत ज्यादा मार्जिन एक समस्या है, लेकिन जटिल बीमारियों के इलाज की कीमत तय करना दूसरा मामला है। स्वास्थ्य पर संसद की स्थायी समिति ने भी जरूरी प्रक्रियाओं, जांच पर सीमा लगाने और कुछ इलाज के लिए तय पैकेज की सिफारिश की है। समस्या यह है कि हर मरीज का इलाज एक जैसा नहीं होता। अस्पतालों की सुविधाएं, स्टाफ, तकनीक और इलाज की जटिलता भी अलग होती है। इसलिए आईवी सेट जैसी चीजों और जटिल इलाज को एक नजर से नहीं देखा जा सकता।
पांच तरीके: तय कीमतों से भी परेशानी हो सकती है। कीमत अधिक होने पर मरीज को नुकसान होता है और बहुत कम होने पर अस्पताल जटिल मरीजों से बच सकते हैं, गुणवत्ता घटा सकते हैं या अन्य चार्ज बढ़ा सकते हैं। PMJAY पर काम करते हुए मैंने देखा है कि सख्त कीमत सीमा का उल्टा असर हो सकता है। भारत को निजी अस्पतालों में निवेश भी चाहिए और मरीजों को अनुचित बिल से सुरक्षा भी। दोनों जरूरतें साथ पूरी की जा सकती हैं। इसके लिए पांच सूत्रीय तरीके अपनाए जा सकते हैं।

पूरी जानकारी: हॉस्पिटल के चार्ज पारदर्शी होने चाहिए। हर हॉस्पिटल को डिजिटल फॉर्मेट में शुल्क की सूची जारी करनी चाहिए। तय इलाज के लिए मरीज को फीस, जांच, दवाओं, डिवाइस, सामान और कमरे का अनुमान पहले ही दिया जाना चाहिए। अंतिम बिल अगर अनुमानित कीमत से अत्यधिक हो तो इसकी वजह बतानी चाहिए। दवाओं, इम्प्लांट और दूसरे सामान पर बहुत ज्यादा मार्जिन की जांच होनी चाहिए। खरीद, भंडारण और बर्बादी की उचित लागत ली जा सकती है। लेकिन, हर मामले में कीमतों में पारदर्शिता जरूरी है।
निगरानी पर जोर: जिन जरूरी चीजों और मेडिकल डिवाइस पर अत्यधिक मार्जिन हो, वहां सरकार को हर प्रॉडक्ट की कीमत तय करने के बजाय ट्रेड मार्जिन, रेफरेंस प्राइसिंग और नियमित कीमत निगरानी पर जोर देना चाहिए। NPPA ने 2019 में 42 नॉन-शेड्यूल्ड कैंसर दवाओं के मार्जिन पर सीमा तय की थी। कोविड के दौरान ऑक्सीजन कंसंट्रेटर समेत पांच मेडिकल डिवाइस पर भी यही तरीका अपनाया गया था।

बड़ी बचत: बेहतर खरीद से भी बड़ी बचत की गुंजाइश रहती है। संसदीय समिति ने टाटा मेमोरियल सेंटर का उदाहरण दिया है। 23 सेंटरों में 40 कैंसर दवाओं की सामूहिक खरीद से अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) के मुकाबले 1,320 करोड़ रुपये की बचत हुई और औसत बचत 82% रही। इसके अलावा, इलाज की जरूरत पर भी निगरानी होनी चाहिए। सिर्फ कीमत घटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। ज्यादा जांच, लंबे समय तक भर्ती और अतिरिक्त इलाज से कमाई बढ़ सकती है। इसलिए हर जांच या प्रक्रिया का मरीज के लिए जरूरी होना भी देखा जाना चाहिए।
ऑडिट हो: सरकारी एजेंसियों और इंश्योरेंस कंपनियों को डेटा के आधार पर उन अस्पतालों की पहचान करनी चाहिए, जहां सिजेरियन, ICU में भर्ती, जांच या कुछ खास इलाज की दर सामान्य से बहुत ज्यादा है। इसके लिए क्लिनिकल ऑडिट और इलाज के तय मानकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। सिर्फ कीमत नहीं, इलाज की गुणवत्ता की जानकारी भी मरीजों को मिलनी चाहिए। अस्पतालों को संक्रमण, दोबारा भर्ती होने की दर, कुछ इलाज के बाद मृत्यु दर और मरीजों के अनुभव जैसे आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए। इससे मरीज कीमत और इलाज की गुणवत्ता, दोनों के आधार पर फैसला ले सकेंगे।
सरकारी व्यवस्था जरूरी: अंत में, सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। प्राइवेट हॉस्पिटल की ज्यादा कीमतों से बचने का यह एक प्रभावी तरीका है। इससे सरकार को भी बेहतर इलाज की वास्तविक लागत समझने में मदद मिलेगी। महाराष्ट्र में सामने आए ज्यादा कीमत वसूलने के मामलों की पारदर्शी जांच और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन, हर इलाज की कीमत को एक ही तरीके से तय करना सही नहीं होगा। लक्ष्य सिर्फ सस्ता इलाज नहीं, उचित कीमत पर बेहतर और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवा होना चाहिए। इससे मरीजों के हित भी सुरक्षित रहेंगे और निवेश व नई तकनीक को बढ़ावा मिलेगा।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 25 September 2026
गुजरात के जूनागढ़ जिले में बुधवार रात तेंदुए ने 6 साल की बच्ची पर हमला कर उसे मार डाला। बच्ची की पहचान प्रिशा सोलंकी के रूप में हुई है। घटना…
 25 September 2026
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायक पोस्टर लेकर पहुंचे। इन पर लिखा था कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा…
 25 September 2026
नई दिल्लीः मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार , दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के बीच दूरी पिछले साल जून में बिहार में एसआईआर के दौरान ही…
 25 September 2026
नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत का पक्ष रखते हुए भारतीय डिप्लोमैट क्षितिज त्यागी ने पाकिस्तान को जमकर फटकार लगाई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दूसरों के इलाके…
 25 September 2026
इंदुभूषण: किसी अस्पताल की इंटेंसिव केयर यूनिट ( ICU ) के बाहर बैठा व्यक्ति अपने परिजन के इलाज की चिंता कर रहा होता है, न कि कीमतों पर मोलभाव। अस्पताल…
 25 September 2026
नई दिल्ली: चुनाव आयोग (EC) को दिए गए ब्यौरे के अनुसार, BJP ने पश्चिम बंगाल में अप्रैल 2026 के चुनावों के दौरान अपने कैंपेन और उम्मीदवारों पर 287 करोड़ रुपये…
 25 September 2026
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवा यात्रा में शामिल लोगों से बातचीत के दौरान कई अहम बातें कहीं। पीएम मोदी ने कहा कि सेवा संकल्प यात्रा में जो अनुभव…
 25 September 2026
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार को बड़ा झटका लगा है। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुभेंदु अधिकारी सरकार के ‘एंटी गुंडा बिल’ पर गंभीर आपत्ति जताई है…
 24 September 2026
राहुल गांधी ने IIT बॉम्बे के स्टूडेंट साहिल वाकोडे के माता-पिता रवींद्र और सोनाली से वीडियो कॉल पर बात की। उन्होंने दोनों को मदद का भरोसा दिया। न्यूज एजेंसी PTI…
Advt.