भोपाल। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा आठवीं से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी की जा रही है, लेकिन उनकी मौजूदा डिजिटल स्थिति इस लक्ष्य के सामने बड़ी चुनौती बन सकती है।
शिक्षा मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआइ) 2025-26 की जिलेवार रिपोर्ट और यूडाइस प्लस के आंकड़ों के अनुसार अधिकांश सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर, इंटरनेट, स्मार्ट क्लासरूम और प्रशिक्षित शिक्षक तक नहीं हैं। भोपाल-इंदौर जैसे सुविधा संपन्न जिले भी इस मामले में औसत हैं। वहीं निवाड़ी, आलीराजपुर और झाबुआ की स्थिति प्रदेश में सबसे कमजोर है
रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 63 हजार सरकारी स्कूलों में इंटरनेट सुविधा और 38 हजार स्कूलों में कंप्यूटर नहीं हैं। शिक्षाविद डा. दामोदर जैन का कहना है कि यदि सरकारी स्कूलों में डिजिटल बुनियादी ढांचे को शीघ्र मजबूत नहीं किया गया, तो राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत एआइ और आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा का लक्ष्य अधूरा रह सकता है। डिजिटल शिक्षा के लिए सबसे पहले स्कूलों में बिजली, इंटरनेट, कंप्यूटर, स्मार्ट क्लासरूम और प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता आवश्यक है।
पीजीआइ रिपोर्ट में डिजिटल लर्निंग के लिए 50 अंकों का मूल्यांकन किया गया। इसमें इंदौर को 21, भोपाल को 20, ग्वालियर को 17 और जबलपुर को 14 अंक मिले। यानी प्रदेश के बड़े शहर भी औसत प्रदर्शन से आगे नहीं बढ़ सके। वहीं निवाड़ी जिला छह अंकों के साथ प्रदेश में सबसे फिसड्डी रहा। आलीराजपुर और झाबुआ जिलों को आठ-आठ अंक मिले हैं।
स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के गृह जिले नरसिंहपुर का प्रदर्शन भी कई मानकों पर कमजोर रहा। डिजिटल लर्निंग में उसे 50 में से 14 अंक, लर्निंग आउटकम्स में 290 में से 159 अंक, प्रभावी कक्षा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में 90 में से 51 अंक, स्कूल सुरक्षा एवं बाल संरक्षण में 35 में से 13 अंक और शासन प्रक्रिया में 84 में से 46 अंक प्राप्त हुए।
(नोट- प्रति मानक के 10 अंक निर्धारित किए गए थे।)
(नोट- यूडाइस प्लस 2025-26 से आंकड़े लिए गए हैं।)
पीजीआइ की रैंकिंग की समीक्षा अभी की जा रही है। जिलेवार समीक्षा कर हर क्राइटेरिया में सुधार करने का प्रयास किया जाएगा। डॉ. संजय गोयल, सचिव, स्कूल शिक्षा