सऊदी अरामको ने भारत के लिए बंद कर दी अपनी तेल टंकी, कैसे चलेगी हमारी गाड़ी?
Updated on
17-09-2026 12:16 PM
नई दिल्ली: सऊदी अरब भारत के टॉप क्रूड सप्लायरों में शामिल है। लेकिन हूती विद्रोहियों ने आजकल उसकी नाक में दम कर रखा है। उन्होंने सऊदी अरब की अहम ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले किए हैं। इसके मद्देनजर वहां की सरकारी कंपनी सऊदी अरामको ने भारतीय रिफाइनरियों के लिए तेल की सप्लाई बंद कर दी है। हालांकि भारतीय रिफाइनरीज के लिए दूसरे स्रोतों से तेल ढूंढना मुश्किल नहीं होगा, लेकिन बढ़ती कीमतें और ढुलाई का ज्यादा खर्च उनके लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं।ईटी की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के समुद्री रास्ते में सप्लाई में रुकावट आने के बाद से सऊदी अरब इस पाइपलाइन के जरिए तेल की सप्लाई कर रहा था। लेकिन पिछले हफ्ते के आखिर में ड्रोन हमलों के बाद इसे बंद कर दिया गया था।ज्यादा कीमत का जोखिम
सूत्रों ने बताया कि अरामको ने लाल सागर और होर्मुज दोनों रास्तों से देश को होने वाली सभी सप्लाई रोक दी है। हालांकि सऊदी अरब ने कुछ 'स्पॉट कार्गो' उन व्यापारियों को बेचे हैं जो होर्मुज के रास्ते जोखिम उठाते हैं। इस तेल के भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचने की उम्मीद है। ये लोग भारी छूट पर कच्चा तेल खरीदते हैं और उसे होर्मुज के रास्ते ओमान की खाड़ी तक लाते हैं। जहां वे भारतीय और अन्य ग्राहकों को आगे डिलीवरी के लिए कार्गो को एक जहाज से दूसरे जहाज में ट्रांसफर करते हैं।आमतौर पर अरामको स्पॉट मार्केट में कच्चा तेल नहीं बेचती है। कंपनी आधिकारिक बिक्री कीमतों पर सालाना टर्म कॉन्ट्रैक्ट के तहत भारत और अन्य ग्राहकों को सप्लाई करती है। लेकिन भारत को अभी सऊदी अरब से अपने तय कॉन्ट्रैक्ट के तहत सप्लाई नहीं मिल रही है। भारतीय रिफाइनरियों को भरोसा है कि वे दूसरे विकल्पों से तेल हासिल कर लेंगी, लेकिन उन्हें ज्यादा कीमत चुकानी होगी।सऊदी अरब की अहमियत
हाल में ब्रेंट क्रूड की कीमत में काफी तेजी आई है। इस हफ्ते यह 108 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। साथ ही भारत को रूसी कच्चे तेल पर मिलने वाली छूट खत्म हो गई है। सप्लाई में रुकावट के दौरान स्पॉट मार्केट की कीमतें फ्यूचर्स की कीमतों की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ सकती हैं। टैंकर का किराया पहले से ही रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब है।
रिफाइनरी इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों को चिंता है कि सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच चल रहा टकराव और बढ़ सकता है। इससे वहां एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए खतरा बढ़ सकता है। सऊदी अरब लंबे समय से दुनिया के बड़े तेल सप्लायर्स में से एक रहा है। ग्लोबल प्रोडक्शन में उसकी हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी है और वह बाजार की स्थितियों के हिसाब से उत्पादन में बदलाव कर सकता है।