
केंद्र सरकार के इस फैसले का सीधा असर उन लाखों लोगों पर पड़ेगा, जो महंगाई के इस दौर में आर्थिक मदद बढ़ने की उम्मीद लगाए बैठे थे।
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि नीति आयोग और अन्य मूल्यांकन अध्ययनों ने सहायता राशि में वृद्धि करने और भुगतान प्रणाली को मजबूत करने की सिफारिश की थी। अध्ययनों में यह भी पाया गया कि लाभार्थी इस पेंशन का उपयोग मुख्य रूप से भोजन और स्वास्थ्य देखभाल जैसी अनिवार्य जरूरतों के लिए कर रहे हैं। इसके बावजूद, सरकार ने फिलहाल राशि बढ़ाने से इनकार कर दिया है।
दिव्यांग पेंशन देने में एमपी देश में नंबर-2
यहां यह भी बता दें कि राज्यसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। विशेष रूप से विकलांगता पेंशन (IGNDPS) के मामले में मध्य प्रदेश 1,01,470 लाभार्थियों के साथ देश में दूसरे स्थान पर है, केवल बिहार ही इससे आगे है।
मध्य प्रदेश को मिले यूपी-बिहार से भी ज्यादा पैसे
दिलचस्प तथ्य यह है कि चालू वित्तीय वर्ष (31 जनवरी 2026 तक) के दौरान केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश को 889.77 करोड़ रुपए की निधि जारी की है। यह राशि उत्तर प्रदेश (813.48 करोड़) और बिहार (691.80 करोड़) जैसे बड़े राज्यों को मिले फंड से भी अधिक है।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन (IGNOAPS)
मध्य प्रदेश में मुख्य रूप से वृद्धावस्था पेंशन की राशि 600 रुपए प्रति माह निर्धारित है, लेकिन इसमें केंद्र और राज्य का अंश लाभार्थी की श्रेणी और उम्र के हिसाब से बदल जाता है।
60 से 79 वर्ष की आयु वर्ग के बुजुर्गों को कुल 600 रुपए मिलते हैं। इसमें केंद्र सरकार 200 रुपए देती है जबकि मध्य प्रदेश सरकार 400 रुपए अपनी ओर से मिलाती है। 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र वाले बुजुर्गों को कुल 600 रुपए ही मिलते हैं, लेकिन इसमें केंद्र का हिस्सा बढ़कर 500 रुपए हो जाता है और राज्य का हिस्सा घटकर 100 रुपए रह जाता है।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन (IGNWPS)
40 से 79 वर्ष की BPL यानी गरीबी रेखा के नीचे वाली श्रेणी में आने वाली विधवाओं को कुल 600 रुपए प्रति माह दिए जाते हैं। इसमें केंद्र का अंश 300 रुपए और राज्य का अंश 300 रुपए होता है।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन (IGNDPS)
18 से 79 वर्ष के 80% या अधिक दिव्यांगों को कुल 600 रुपए मिलते हैं। इसमें केंद्र और राज्य दोनों 300-300 रुपए का योगदान देते हैं। 80 वर्ष के बाद केंद्र का हिस्सा 500 रुपए और राज्य का हिस्सा 100 रुपए हो जाता है।