कानवन क्षेत्र के दत्तिगारा गांव में 10 बीघा में सोयाबीन बोने वाले किसान ने बेहतर अंकुरण के दावे वाली दवा का उपयोग किया, लेकिन फसल खराब हो गई और बीज अंकुरित नहीं हुए। आर्थिक नुकसान से परेशान किसान ने उसी कृषि आदान विक्रेता की दुकान पर कीटनाशक पी लिया। समय रहते अस्पताल पहुंचाने से जान बच गई। पुलिस ने विक्रेता के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जिले के अन्य हिस्सों से भी सोयाबीन के खराब अंकुरण की शिकायतें मिल रही हैं।
जिले में प्रतिबंधित 5जी कपास के बीज की बिक्री जारी है। कसरावद के 13 किसानों की 20 हेक्टेयर मक्का फसल में भुट्टों में केवल 30-35 प्रतिशत दाने विकसित हुए। जांच में शिकायत सही मिलने पर संबंधित बीज किस्म पर जिले में प्रतिबंध लगा दिया गया।
पहले अधिक बारिश और फिर लंबे अंतराल से बारिश नहीं होने से फसल प्रभावित हुई। इसी बीच चार कंपनियों के बीज जांच में अमानक पाए गए, लेकिन रिपोर्ट बोवनी पूरी होने के बाद आई। प्रतिबंध के बावजूद 5जी कपास के बीज बिना बिल बिकने की शिकायतें भी हैं।
संदिग्ध गुणवत्ता वाले बीज और कीटनाशकों की बिना बिल बिक्री किसानों के लिए परेशानी बन रही है। खराब बीज निकलने पर शिकायत और मुआवजे का आधार नहीं बचता। कृषि विभाग अधिकृत विक्रेताओं से बिल लेकर खरीदारी की सलाह दे रहा है।
सोयाबीन और मक्का के पांच से अधिक लाट अमानक मिलने पर प्रतिबंध लगाया गया। किसानों का कहना है कि कई जगह अब भी बिना बिल बीज और कीटनाशक बेचे जा रहे हैं। बारिश की कमी नई चिंता है।
करीब दो सप्ताह से पर्याप्त बारिश नहीं होने से कई क्षेत्रों में बीज नहीं उगे और किसानों को दूसरी-तीसरी बार बोवनी करनी पड़ी। 3.20 लाख हेक्टेयर खरीफ बोवनी के बीच मूंगफली के बीजों के अंकुरण की शिकायतें भी कृषि विभाग तक पहुंची हैं।