अधिकारियों का कहना है कि नियमों के अनुरूप पदोन्नति नहीं होने से सामान्य वर्ग और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के हजारों कर्मचारी एवं अधिकारी पदोन्नति से वंचित रह गए हैं।
पुलिस विभाग की पदोन्नति पर सबसे ज्यादा सवाल
प्रदेश में सबसे अधिक पदोन्नति पुलिस विभाग में हुई है। सरकार के अनुसार पुलिस महकमे में करीब 25 हजार पदोन्नतियां की गई हैं, जिसकी मुख्यमंत्री भी सार्वजनिक रूप से सराहना कर चुके हैं। हालांकि अब पदोन्नति से वंचित अधिकारी इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि अधिकारियों ने नियमों का पालन नहीं किया और अब गलती स्वीकार करने के बावजूद सुधारात्मक कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। प्रभावित अधिकारी मामले को लेकर न्यायालय जाने की तैयारी में हैं।
2025 की चयन सूची की जगह बाद की सीआर पर किया गया विचार
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 की कंडिका-6 के अनुसार यदि किसी चयन वर्ष की विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक समय पर नहीं हो पाती है, तो अगली बैठक में सबसे पहले उस लंबित चयन वर्ष की अलग चयन सूची तैयार की जानी चाहिए। इसके बाद वर्तमान और आगामी रिक्तियों के लिए नई चयन सूची बनाई जानी चाहिए।
आरोप है कि अधिकांश विभागों ने इस प्रावधान का पालन नहीं किया और वर्ष 2025 की रिक्तियों के लिए निर्धारित प्रक्रिया की बजाय बाद के वर्षों के आधार पर पदोन्नति आदेश जारी कर दिए।
जीएडी ने स्पष्टीकरण में क्या कहा
सामान्य प्रशासन विभाग ने 19 जून 2025 को लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 जारी किए थे। इसके बाद 30 जून 2025 को जारी स्पष्टीकरण में स्पष्ट किया गया कि:
नियमों के पालन की मांग
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि विभागों ने जीएडी के स्पष्ट दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया, जिससे बड़ी संख्या में पात्र अधिकारी पदोन्नति से वंचित हो गए। उन्होंने पदोन्नति प्रक्रिया की समीक्षा कर नियमों के अनुरूप संशोधित आदेश जारी करने की मांग की है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो मामले को न्यायालय में चुनौती देने की बात भी कही गई है।