नई दिल्ली। जोड़ों में दर्द, सूजन, अकड़न और चलने-फिरने में तकलीफ- ये सभी अर्थराइटिस के आम लक्षण हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह बीमारी हर किसी के लिए एक जैसी नहीं होती?

जी हां, अर्थराइटिस कई तरह का होता है, इसलिए इसके लक्षणों को सही से समझना और सही जांच कराना बहुत जरूरी है। आइए जानते हैं कि गठिया को लेकर लोग क्या सोचते हैं और असल में विज्ञान क्या कहता है।


क्या उंगलियां चटकाने से अर्थराइटिस होता है?

अक्सर बड़े-बुजुर्ग उंगलियां चटकाने से मना करते हैं और कहते हैं कि इससे जोड़ों की बीमारी हो जाएगी। हालांकि, सच तो यह है कि रिसर्च में अब तक उंगलियां चटकाने और अर्थराइटिस के बीच कोई सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है।


क्या ज्यादा टाइपिंग करने से जोड़ों को पहुंचता है नुकसान?

आजकल लोग लगातार फोन पर मैसेज टाइप करते रहते हैं और डरते हैं कि इससे उनकी उंगलियों के जोड़ों में गठिया हो जाएगा। डॉक्टर के मुताबिक, लगातार फोन के इस्तेमाल से हाथों में दर्द, तनाव या कुछ समय के लिए तकलीफ जरूर हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको अर्थराइटिस हो गया है। थोड़े समय के दर्द और ऐसी बीमारी जिसमें मेडिकल हेल्प चाहिए हो, उसके बीच के फर्क को समझना जरूरी है।


क्या यह सिर्फ बुढ़ापे की बीमारी है?

एक बहुत बड़ा मिथक यह है कि गठिया केवल बढ़ती उम्र का हिस्सा है और इसका कुछ नहीं किया जा सकता। यह सच है कि कुछ खास तरह का गठिया उम्रदराज लोगों में ज्यादा होता है, लेकिन युवा लोग भी इसका शिकार हो सकते हैं। अच्छी खबर यह है कि सही इलाज से इसके लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है और रोजमर्रा के काम आसानी से किए जा सकते हैं।

क्या अर्थराइटिस के हर मरीज को सर्जरी करानी पड़ती है?

सर्जरी का नाम सुनते ही कई लोग घबरा जाते हैं। हालांकि, सच्चाई यह है कि अर्थराइटिस के हर मरीज को सर्जरी की जरूरत नहीं होती। ज्यादातर लोगों को दवाइयों, फिजियोथेरेपी, वजन कम करने और लाइफस्टाइल में बदलाव करने से ही काफी आराम मिल जाता है। अगर इन सब उपायों के बाद भी दर्द बर्दाश्त से बाहर हो जाए और रोजमर्रा के कामों में रुकावट आने लगे, तभी जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के बारे में विचार किया जाता है।

क्या है सबसे सही रास्ता?

सबसे जरूरी बात यह है कि कभी भी जोड़ों के लगातार होने वाले दर्द को नजरअंदाज न करें और सुनी-सुनाई बातों या मिथकों पर भरोसा न करें। अगर आपको कोई भी तकलीफ है, तो डॉक्टर के पास जाएं। डॉक्टर सही से आपके लक्षणों की जांच करके आपके लिए सबसे बेहतर इलाज का तरीका बता सकते हैं।

(डॉ. अनुज अग्रवाल, कैलाश दीपक हॉस्पिटल के सीनियर ऑर्थोपेडिक और जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन हैं)