कटनी जिले के कैमोर में एस्बेस्टस युक्त औद्योगिक कचरे के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। गुरुवार, 5 नवंबर को जबलपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब मांगा।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कैमोर में दशकों तक एस्बेस्टस फैक्ट्री से निकला कचरा आसपास के इलाकों में डाला गया, जिससे मिट्टी, पर्यावरण और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ा है।
10 लाख टन दूषित मिट्टी होने का अनुमान
याचिका के मुताबिक, ब्रिटिश कंपनी टर्नर एंड न्यूऑल पीएलसी ने 1934 में कैमोर में एस्बेस्टस फैक्ट्री शुरू की थी। फैक्ट्री से निकले कचरे को कई साल तक आसपास के क्षेत्रों में डाले जाने का आरोप है।
याचिका में कहा गया है कि रिहायशी इलाकों, सार्वजनिक जगहों और अन्य स्थानों पर एस्बेस्टस युक्त कचरा मौजूद हो सकता है। याचिका में पर्यावरणीय अध्ययन और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों का हवाला देते हुए कैमोर के आसपास करीब 10 लाख टन एस्बेस्टस से दूषित मिट्टी होने का अनुमान दिया गया है।
कनाडाई पर्यावरण संस्था ईसीओएच की रिपोर्ट में भी करीब 10 लाख टन दूषित सतही मिट्टी का उल्लेख है। विभिन्न रिपोर्टों में करीब 5.65 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में एस्बेस्टस प्रदूषण और हजारों लोगों के इसके संपर्क में आने की आशंका जताई गई है।
बीमारियों और मेडिकल रिकॉर्ड का हवाला
याचिका में कहा गया है कि एस्बेस्टस के बारीक रेशे हवा के जरिए शरीर में पहुंचकर फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके संपर्क से एस्बेस्टोसिस, फेफड़ों का कैंसर और मेसोथेलियोमा जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
याचिकाकर्ताओं ने मेडिकल कैंप, जांच रिपोर्ट और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कैमोर में एस्बेस्टस जनित बीमारियों से प्रभावित लोगों की पहचान होने की बात कही है।
दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2013 से मेडिकल कैंप के जरिए ऐसे मरीजों की जांच की जा रही है। सैकड़ों प्रभावित लोगों के मेडिकल रिकॉर्ड और बीमारी से जुड़े मुआवजे के दस्तावेज भी उपलब्ध होने का दावा किया गया है। याचिका में इन रिकॉर्ड की सक्षम अधिकारियों से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।
याचिका में टर्नर एंड न्यूऑल पीएलसी और बेल्जियम की कंपनी ईटेक्स (ETEX) से जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों के बाद फैक्ट्री के स्वामित्व में हुए बदलावों का भी उल्लेख है। वर्तमान में फैक्ट्री एवरेस्ट इंडस्ट्रीज लिमिटेड के स्वामित्व में संचालित होने की बात कही गई है।
याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि पहले जमा हुए एस्बेस्टस कचरे की मौजूदा स्थिति क्या है और उसके सुरक्षित निस्तारण तथा प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी किसकी है। उनका कहना है कि स्वामित्व बदलने से पर्यावरण और नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े सवाल खत्म नहीं होते। संबंधित सरकारी और पर्यावरणीय प्राधिकरणों को मामले की जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
यह जनहित याचिका समाजसेवी आशुतोष दीक्षित मनु और कैमोर निवासी गणेश राव ने दायर की है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आर्यन उर्मलिया ने पैरवी की। याचिका में नागरिकों के जीवन, स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की गई है।