भारत कैसे बनेगा विकसित? CEA अनंत नागेश्वरन ने कहा- प्राइवेट सेक्टर का पैसा जरूरी, राज्यों को बताए 3 बड़े काम
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20-09-2026 01:47 PM
नई दिल्ली: केंद्र सरकार विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए काफी सजग नजर आ रही है। इसके लिए प्राइवेट सेक्टर के पैसे की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी कहा जा रहा है। मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) अनंत नागेश्वरन ने शनिवार को कहा कि भारत का बचत आधार मजबूत है और इसे आगे भी बढ़ाने की जरूरत है, लेकिन 2047 तक विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी पूंजी से बड़े स्तर पर निवेश जुटाना जरूरी होगा। उन्होंने यह बात 'फाइनेंसिंग इंडियाज जर्नी टुवर्ड्स विकसित भारत' विषय पर आयोजित एक सम्मेलन में कही।उन्होंने कहा कि निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्यों में जमीन, बिजली और लॉजिस्टिक्स जैसी जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। इसके साथ ही प्रभावी सिंगल-विंडो क्लियरेंस सिस्टम भी जरूरी है, ताकि निवेशकों को अलग-अलग मंजूरियों के लिए लंबी प्रक्रिया से न गुजरना पड़े।CEA ने बताईं तीन प्रमुख प्राथमिकताएं
सीईए अनंत नागेश्वरन ने सम्मेलन में कहा कि विकसित भारत का सपना विकसित राज्यों पर निर्भर करता है। उन्होंने राज्यों के सामने आर्थिक प्रगति में तेजी लाने के लिए तीन मुख्य प्राथमिकताएं बताईं।- उन्होंने कहा कि निजी निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाना होगा। इसके लिए राज्यों में जमीन, बिजली और लॉजिस्टिक्स की आसान उपलब्धता के साथ सिंगल-विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था को मजबूत बनाना।
- मजबूत प्रोजेक्ट-प्रिपेरेशन्स और प्रामाणिक रिपोर्ट तैयार करना ताकि घरेलू व बहुपक्षीय वित्तपोषण आसानी से मिल सके। इसके साथ ही विकास की संभावनाओं वाले पिछड़े जिलों की तरफ क्रेडिट प्रवाह बढ़ाना।
- राज्यों को पूंजीगत खर्च बढ़ाना होगा। सीईए ने कहा कि वित्तीय बाधाओं के बावजूद बुनियादी ढांचे पर खर्च को बढ़ाना जरूरी है। इस संदर्भ में उन्होंने महाराष्ट्र के पूर्व अपर मुख्य सचिव सुधीर श्रीवास्तव के उस प्रस्ताव का जिक्र किया, जिसमें वित्त वर्ष 2031-32 तक राज्यों के पूंजीगत परिव्यय को GSDP के 2.4% से बढ़ाकर 3% करने की बात कही गई है।
अगले 5 साल बेहद अहम
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, नागेश्वरन ने भारत के सामने मौजूद दोहरी चुनौती को रेखांकित किया। एक तरफ देश को 2047 तक के दीर्घकालिक विकास लक्ष्य को बनाए रखना है, वहीं अगले पांच वर्षों में संसाधन जुटाने की रफ्तार भी बढ़ानी होगी।
उन्होंने कहा कि इस अवधि में वैश्विक स्तर पर उपलब्ध वित्तीय अवसरों का लाभ उठाने के लिए भारत को निवेश और संसाधन जुटाने की क्षमता मजबूत करनी होगी। सम्मेलन में भारत के मैक्रोइकोनॉमिक आउटलुक, कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए वित्तपोषण और ऊर्जा संक्रमण के लिए फंडिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई।